परंपरा, त्योहार और उत्सव

हमारे गाँव की सांस्कृतिक पहचान उसकी परंपराओं, त्योहारों और उत्सवों में गहराई से रची-बसी है। यहाँ हर पर्व सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि एक जीवंत अनुभव होता है जो पूरे समुदाय को एक साथ बाँधता है। होली के रंगों में जहाँ हँसी और मेलजोल की बौछार होती है, वहीं दीवाली की रातें दीपों की जगमगाहट से हर घर को रोशन करती हैं। छठ पूजा में श्रद्धालु सूर्य को अर्घ्य देने के लिए घाटों पर एकत्र होते हैं, और करम पर्व में प्रकृति तथा भाई-बहन के रिश्ते की पूजा की जाती है। दुर्गा पूजा  में पंडाल सजते हैं, शोभायात्राएँ निकलती हैं और आरती की गूंज हर दिशा में सुनाई देती है। इन पर्वों की रौनक को और भी खास बनाते हैं हमारे लोकगीत, जो पीढ़ियों से हमारी संस्कृति की धड़कन बने हुए हैं। चाहे वो विवाह के गीत हों, फसल की खुशी में गाए जाने वाले गीत हों या पर्वों पर गूंजते भक्ति गीत—हर सुर में गाँव की आत्मा बसती है। यह अनुभाग हमारे सांस्कृतिक खजाने की एक झलक है, जहाँ परंपरा सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि आज भी हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है।