Source of content, photos & video : Dilip Kumar, Jaynagar, Garhwa.
सुबह के शुरुआती घंटों में, झारखंड के जयनगर गाँव के खेत केवल उगते सूरज से ही नहीं, बल्कि नीलगाय के झुंड से भी जाग उठते हैं। जो कभी एक दुर्लभ नज़ारा होता था, अब किसानों के लिए रोज़ की चुनौती बन गया है।
ये झुंड खुलेआम खेतों में घूमते हैं और अक्सर गेहूँ, सरसों और धान की खड़ी फसलों को नुकसान पहुँचाते हैं। महीनों की मेहनत और उम्मीदें कुछ ही रातों में बर्बाद हो जाती हैं। छोटे किसानों के लिए, जिनका जीवन पूरी तरह उनकी फसल पर निर्भर करता है, यह नुकसान बेहद दुखद और कभी-कभी असहनीय हो जाता है।
नीलगाय की समस्या केवल फसल बर्बादी की नहीं है—यह रोज़गार, अन्न-सुरक्षा और ग्रामीण जीवन के संतुलन का सवाल है। चूँकि ये जीव वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत सुरक्षित हैं, किसान अक्सर बेबस रह जाते हैं—वे इन्हें पूरी तरह भगा नहीं सकते और न ही आसानी से अपनी उपज की रक्षा कर पाते हैं।
जयनगर की जद्दोजहद

ऊपर दिया गया चित्र 8 मार्च 2025 को जयनगर गाँव में लिया गया है। इसमें साफ़ दिखाई देता है कि कैसे नीलगायों का झुंड खेतों में घूम रहा है, पृष्ठभूमि में भूसे के ढेर और खेत दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य बताता है कि हमारी ज़मीनों में यह चुनौती कितनी गहरी जड़ें जमा चुकी है।
गाँववाले परंपरागत तरीक़ों से बचाव की कोशिश करते हैं—रात भर पहरा देना, शोर मचाना, अस्थायी बाड़ लगाना—लेकिन नीलगाय मज़बूत और झुंड में चलने वाले जानवर हैं, जिन्हें रोक पाना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
समाधान की राह
यह समस्या समुदाय और नीति—दोनों स्तरों पर समाधान की माँग करती है:
किसानों के लिए जागरूकता और सहयोग कार्यक्रम।
सौर या पर्यावरण-अनुकूल बाड़बंदी।
वन और वन्यजीव विभाग के साथ मिलकर सुरक्षित पुनर्वास या प्रबंधन।
ऐसी फसलें जिन पर नीलगाय का असर कम हो, उनके विकल्प तलाशना।
ध्यान देने की ज़रूरत
जयनगर के किसानों की यह परेशानी आज पूरे भारत के कई गाँवों की कहानी है। यदि तुरंत और व्यवहारिक कदम नहीं उठाए गए, तो मेहनत और नुकसान का यह सिलसिला चलता ही रहेगा।
हमारे खेतों को सुरक्षा चाहिए, किसानों को सहारा चाहिए, और वन्यजीवों का ऐसा प्रबंधन चाहिए जिसमें जीव-जंतु और आजीविका दोनों सुरक्षित रहें।
“Every crop is a farmer’s dream.
But the rising Nilgai menace is turning dreams into losses.
Our farmers need support—NOW!”
