जय नगर की कृषि

जय नगर का जीवन कृषि पर आधारित है। खेत, फसल और मेहनतकश किसान ही गाँव की आत्मा हैं। खेती यहाँ केवल ज़रूरत नहीं, एक परंपरा है। धान, गेहूं, गन्ना, सरसों से लेकर हल्दी और दालों तक—हर फसल में मेहनत और मिट्टी की सोंधी खुशबू है। यही खेती गाँव की आत्मनिर्भरता और जीवन का आधार है।

धान (Paddy)

धान केवल अन्न नहीं, बल्कि गाँव के जीवन और संस्कृति की धड़कन है। सावन-भादो की हरियाली जब खेतों में लहराती है, तो मानो धरती पर नया जीवन उतर आता है।

 

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बरसात में लहलहाते धान के पौधे।

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पानी भरे खेतों में रोपाई—किसानी की रौनक।

गेहूँ (Wheat)

रबी की सुनहरी धूप में पकता हुआ गेहूँ, किसान की मेहनत का स्वर्णिम फल है। खेतों में लहराती सुनहरी बालियाँ गाँव की समृद्धि और तृप्ति का प्रतीक हैं। गेहूँ की कटाई और दाना निकालने की प्रक्रिया गाँव के हर घर को
व्यस्त और खुशहाल बना देती है।

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पकी हुई गेहूँ की बालियाँ—सोने जैसी चमक।

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कटाई के बाद खलिहान में गेहूँ के गट्ठर।

सरसों (Mustard)

सरसों की पीली चादर गाँव की धरती को स्वर्ण-रूप दे देती है। यह केवल तेल और भोजन का साधन नहीं, बल्कि गाँव की सुंदरता और उमंग का प्रतीक है।

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चारों ओर फैली सरसों की सुनहरी बयार।

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सरसों के फूलों की खुशबू में लिपटी एक प्यारी मुस्कान।

गन्ना (Sugarcane):

हमारे गाँव को गन्ने के हरे-भरे खेतों का आशीर्वाद मिला हुआ है, जो हमारे मेहनती किसानों और हमारी उपजाऊ भूमि का प्रमाण हैं। ये खेत सिर्फ फसल नहीं, बल्कि हमारे गाँव की पहचान हैं, जो हमें समृद्धि और मिठास देते हैं।

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गन्ने के हरे-भरे खेत

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गन्ने के स्वाद का आनंद लेते हुए

हल्दी (Turmeric):

औषधीय गुणों से भरपूर हल्दी यहाँ पारंपरिक खेती का एक अहम हिस्सा है। यह स्वास्थ्य, संस्कृति और घरेलू रसोई का अभिन्न अंग है।

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खेत की मिट्टी से उगती, सेहत और स्वाद से भरपूर हल्दी।

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खेत से हल्दी निकालते हुए।

सिंचाई के साधन

नहर (Canal):

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गाँव के पश्चिमी भाग से होकर बहती है नहर, जो जयनगर की कृषि की जीवनरेखा है। इसकी धारा खेतों को सींचती है और गेहूँ, धान, सरसों और गन्ने जैसी फसलों को जीवन देती है। यह नहर केवल जलस्रोत ही नहीं, बल्कि आजीविका और समृद्धि का आधार है।

अहरा (Pond):

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नहर के पास स्थित है हमारा अहरा (तालाब), जो जयनगर की प्राकृतिक धरोहर है। यह सिंचाई, पशुओं और दैनिक आवश्यकताओं के लिए जल उपलब्ध कराता है और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखता है। इसका शांत और निर्मल जल जयनगर की आत्मा को प्रतिबिंबित करता है—शांत, पोषक और जीवन से गहरा जुड़ा हुआ।

सौर पंप (Solar Pump):

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जयनगर गाँव में अब सिंचाई के लिए सोलर पंप की सुविधा शुरू हो गई है। यह पंप सौर ऊर्जा से चलता है और किसानों को बिना बिजली खर्च किए खेतों में पानी पहुँचाने में मदद करता है। इससे न सिर्फ मेहनत कम होती है, बल्कि समय और लागत की भी बचत होती है। यह पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ तकनीक है, जो गाँव की खेती को और अधिक सशक्त बनाएगी।